ड्रैगन (2025) का द्वेध: प्रदीप रँगनाथन की नई फ़िल्म ने Critics को बाँटा दो हिस्सों में

ड्रैगन (2025) का द्वेध: प्रदीप रँगनाथन की नई फ़िल्म ने Critics को बाँटा दो हिस्सों में

जब प्रदीप रँगनाथन, अभिनेता तमिलनाडु फिल्म इंडस्ट्री ने ड्रैगन (2025)तमिलनाडु में अपना नया किरदार ‘राघवन’ (जिसे ‘ड्रैगन’ भी कहा जाता है) पेश किया, तो शहर‑भर में चर्चा का सैलाब शुरू हो गया। फिल्म का प्रीमियर 21 फ़रवरी 2025 को तमिलनाडु के कई मल्टीप्लेक्स में हुआ, और दो‑तीन हफ्ते बाद बॉक्सऑफ़िस टॉप चार्ट में जगह बना ली। लेकिन समीक्षकों का जवाब‑बात बिल्कुल वैसा नहीं था जैसा प्रोडक्शन हाउस ने उम्मीद की थी।

फ़िल्म की पृष्ठभूमि और निर्माण

ड्रैगन के पीछे अश्वथ मारिमुथु, निर्देशकर्ता हैं, जो अपनी पहली फ़िल्म लुब्बर पंधु के बाद इस द्वितीय प्रोजेक्ट पर कूद पड़े। यह प्रोजेक्ट उनका दूसरा निदेशन था, और उन्होंने इसे ‘नैतिकता की कहानी’ के रूप में पेश किया। मुख्य महिला भूमिका कायडु लोहर, अभिनेत्री ने निभाई, जो राघवन की मंगेतर पल्लवी का किरदार है।

सुनसान सेट‑अप से लेकर मुंबई‑चेन्नई के बीच की दूरी को दिखाने वाले ट्रैक्शन तक, निर्माण टीम ने बहुत मेहनत की। इंटीरियर्स, कॉलेज की छत पर हुए क्लाइमैक्स सीन, और ‘फ़ेक मार्क शीट’ के क़दम‑दर‑क़दम दिखाने वाले शॉट्स को विशेष ध्यान दिया गया।

क्रिटिकल रिसेप्शन: दो खंड, दो राय

इंस्टेंट रिव्यूज़ ने फिल्म को दो हिस्सों में बाँट दिया। वित्तल संकरासुब्रमणियन, IMDb रिव्यूअर ने 21 फ़रवरी 2025 को लिखा: “पहला भाग राघवन की धोखाधड़ी भरी ज़िंदगी को दिखाता है, जबकि दूसरा भाग उसे सुधार की राह दिखाता है।” उन्होंने इसे 7/10 अंक दिए। उसी समय इमिटेशन45 ने 1 अप्रैल 2025 को 8/10 का स्कोर दिया, लेकिन “आख़िरी 10 मिनट में सब कुछ बिखर गया” जैसी चुटीली टिप्पणी की।

फिल्म समीक्षक बारादवाज रंजन, फ़िल्म क्रिटिक ने अपने ब्लॉग पर 21 फ़रवरी 2025 को लिखा: “ड्रैगन सबसे हॉलिवुड‑जैसी एंटरटेनमेंट है जो हमें हँसाता‑रोता है, और अंत में उत्साह देता है।” उन्होंने फिल्म को “लुब्बर पंधु के बाद सबसे समग्र मनोरंजन” कहा।

दूसरी ओर, दिग्गज समीक्षक सुभाष के जा, फ़िल्म क्रिटिक ने Bollyspice.com पर “ड्रैगन, जितनी कम कहूँ उतना बेहतर” शीर्षक से सख्त आलोचना की। उन्होंने कहा कि फिल्म “मिसोजिनी, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों को गले लगाती है” और “राघवन का पुनरुद्धार एक ‘अप्राकृतिक’ जुमला है।” उनके प्रमुख बिंदुओं में फर्जी प्रमाणपत्र, नकली मार्क शीट और बोरिंग स्क्रीनप्ले की ख़राब नैतिकता शामिल थी।

वाणिज्यिक सफलता के आँकड़े

समालोचनात्मक तटस्थता के बावजूद ड्रैगन ने बॉक्सऑफ़िस पर धूम मचा दी। यहाँ कुछ मुख्य आँकड़े हैं:

  • पहले सप्ताह में ₹12.5 करोड़ की कमाई, जो तमिल सिनेमा के लिए 2025 का सबसे तेज़ ओपनिंग रहा।
  • तीन हफ्ते बाद कुल जमा ₹45 करोड़ तक पहुँच गया।
  • साथ ही, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म HotFlix ने 30 लाख व्यूज़ के आँकड़े जारी किए।
  • फिल्म की संगीत एल्बम ने यूट्यूब पर 1.2 करोड़ व्यूज़ हासिल किए।

कई दर्शकों ने “बॉक्सऑफ़िस में इतनी सफलता कैसे मिली जबकि समीक्षाएँ मिली‑जुली थीं?” सवाल उठाया, और सोशल मीडिया पर बातों‑बातों में “ड्रैगन का ‘अभिनव’ मार्जिन बदल रहा है” जैसी टिप्पणी आई।

नैतिकता, कहानी और दर्शकों की प्रतिक्रिया

ड्रैगन का सबसे बड़ा टॉकरली सवाल था – क्या यह फिल्म “धोखा” को रोमांटिक बनाती है? सुभाष के जा की तरह, कई दर्शकों ने फ़िल्म में “बॉयज‑विल‑बी‑बॉयज़” की रोमांस की नज़र पड़ी। वहीं, बारादवाज रंजन के अनुयायियों का कहना था कि “फ़िल्म एक सच्ची मनोवैज्ञानिक यात्रा है, जहाँ आप राघवन के हर कदम पर खुद को देखेंगे।”

ट्रेंडिंग सोशल फ़्लॉस में ‘#ड्रैगन_डिवाइड’ टैग के साथ कई मीम्स और छोटे‑छोटे वीडियो आए। कुछ ने पल्लवी‑राघवन के बीच के ‘छत पर बातचीत’ को ‘बेस्ट फेमिनिन‑सेक्सिएस्टींग सीन’ कहा, तो कुछ ने फ़िल्म के अंत में पिता‑बेटा वाले सीन को “जैसे ही लगा कि उसे एक सीन में सारा ग़़लत समझा गया” कहा।

भविष्य की दिशा और उद्योग पर प्रभाव

भविष्य की दिशा और उद्योग पर प्रभाव

ड्रैगन की सफलता ने तमिल फ़िल्म उद्योग में धारा बदल दी। नई कहानी‑टेलिंग, नैतिक द्वंद्व पर फोकस, और एक ही स्टार पर दो‑तिहाई व्यावसायिक भरोसा छोटे‑बड़े प्रोडक्शन हाउज़ दोनों को आकर्षित कर रहा है।

आगामी महीने में, प्रोड्यूसर சினிமி ஸ்டூடியோஸ் ने घोषित किया है कि वे ‘ड्रैगन’ के समान टॉम्पिक पर एक सीरीज़ बनाने की तैयारी में हैं, जिससे इस फ़ॉर्मेट का ‘सिटकॉम‑ड्रामा’ रूप में विस्तार हो सके।

मुख्य तथ्य

  • फ़िल्म: ड्रैगन (2025)
  • निर्देशक: अश्वथ मारिमुथु
  • मुख्य भूमिका: प्रदीप रँगनाथन (राघवन/ड्रैगन)
  • रिलीज़ डेट: 21 फ़रवरी 2025
  • बॉक्सऑफ़िस: पहले 3 हफ्तों में ₹45 करोड़

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ड्रैगन (2025) ने तमिल सिनेमा को कैसे बदल दिया?

फ़िल्म ने न केवल बॉक्सऑफ़िस में रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि नैतिक दुविधा वाले प्रमुख किरदारों को केंद्र में रख कर नई कहानी‑टेलिंग को प्रोत्साहित किया। इससे कई प्रोड्यूसर अब युवा‑निर्देशकों को ‘सामाजिक‑दृष्टिकोण’ वाले प्रोजेक्ट्स में निवेश करने को तैयार हैं।

क्या ड्रैगन में दिखाए गए फर्जी प्रमाणपत्र वास्तविक जीवन में समस्याएँ बनाते हैं?

फ़िल्म ने इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर प्रकाश में लाया, लेकिन आलोचक मानते हैं कि इसे हल्के‑फुल्के ढंग से दिखाने से वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। इसलिए विश्वविद्यालयों और एजेंसियों ने इस पर जागरूकता अभियानों की घोषणा की है।

फिल्म की आलोचना क्यों इतनी तीव्र रही?

मुख्य कारण दो‑मुख्य थे – एक तो कहानी का नैतिक मोड़, जहाँ राघवन का ‘धर्मपरायण पुनरुद्धार’ कुछ समीक्षकों को अस्वाभाविक लगा, और दूसरा इस बात पर कि फ़िल्म में महिलाओं और धोखाधड़ी के साथ‑साथ हल्के‑फुल्के मज़ाक को मिला‑जुला कर प्रस्तुत किया गया। यही कारण है कि कई रिव्यूज़ ने इसे ‘मिसोजिनी‑प्रोमोटिंग’ कहा।

ड्रैगन की बॉक्सऑफ़िस सफलता के पीछे क्या कारक थे?

प्रदीप रँगनाथन की लोकप्रियता, सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग हैशटैग, और मुख्य शहरों (चेन्नई, कोचीन, मुंबई) में व्यापक प्रचार ने मिलकर दर्शकों को आकर्षित किया। साथ ही, फ़िल्म की म्यूजिक ट्रैक्स और ट्रेलर ने भी उत्सुकता बढ़ाई।

भविष्य में ड्रैगन जैसी फ़िल्में बनानी चाहिए या नहीं?

यदि नैतिक गहराई को हल्के‑फुल्के एंटरटेनमेंट के साथ संतुलित किया जाए, तो ऐसी फ़िल्में दर्शकों को आकर्षित कर सकती हैं। परंतु निर्माता को स्पष्ट रूप से यह तय करना होगा कि कहानी में किस दिशा में सामाजिक संदेश देना चाहते हैं, ताकि समीक्षकों की दिक्कतें दोबारा न आएँ।

  • Pooja Joshi

    इनके सभी पोस्ट देखें:

9 टिप्पणि

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    Shailendra Thakur

    अक्तूबर 10, 2025 AT 03:59

    ड्रैगन ने बॉक्सऑफ़िस में धूम मचा दी, आलोचना के क्या काम?

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    kajal chawla

    अक्तूबर 21, 2025 AT 17:45

    सच में, ये फ़िल्म ऐसे नैतिक पत्थर को टोटका बना रही है!!! हर झलक में झूठी आसानियों का जाहिरा ख़ुशबू है... सरकार को इस पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए; नहीं तो युवाओं का दिमाग ग़लत दिशा में धकेला जाएगा... यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जाल बुनने की कोशिश है!!!

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    King Dev

    नवंबर 2, 2025 AT 06:32

    ड्रैगन जैसा बड़का प्रोजेक्ट तमिल सिनेमा में काफी दूर तक असर डाल सकता है। पहला हिस्सा राघवन की अंधेरी ज़िंदगी को पूरा पर्दा दिखाता है, जिससे दर्शकों को अपनी आत्मा की गहराई में झाँकने का मौका मिलता है। वह हिस्से में नकली मार्क शीट जैसी चीज़ें सिर्फ़ एक दृश्य नहीं, बल्कि आज के छात्र जीवन की यथार्थता को उजागर करती हैं। दूसरे भाग में राघवन का सुधार दिखाना, सामाजिक पुनर्निर्माण की आशा को प्रतीकित करता है। यह दोहरी कहानी, नैतिक द्वंद्व को एक ही फ्रेम में बांधती है, जिससे दर्शक को दुविधा में डाल देती है। फिल्म की टक्कराए गए सेट, चेन्नई की गली‑गली और मुंबई के स्काईलाइन का मिश्रण, एक अद्भुत दृश्य कापी बनाता है। संगीत के बीट में स्थानीय दफ़्फ़ा ध्वनि और पॉप रिदम का मिश्रण, युवा वर्ग को लुभाता है। निर्देशक अश्वथ की पहली कोशिश से बेहतर, लुब्बर पंधु की शैली को आगे बढ़ाते हुए, नई कहानी‑टेलिंग को मोड़ दिया है। जबकि कई समीक्षक इसे ‘मिसोजिनी‑प्रोमोटिंग’ कह रहे हैं, दर्शक इसे ‘प्लॉडियन‑एंट्री’ की तरह देख रहे हैं। बॉक्सऑफ़िस में ₹45 करोड़ की कमाई, यह स्पष्ट करता है कि लोग ऐसा कंटेंट चाहते हैं जो औसर की हँसी‑और‑रोदनी को मिश्रित करे। ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर 30 लाख व्यूज़, दर्शकों की जिज़्ञासा को दर्शाते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि फिल्म की फ़ैशन और कास्टिंग ने फैशन ब्लॉगरों को भी प्रेरित किया है। ऐसी फ़िल्में सामाजिक चर्चा को भी बढ़ावा देती हैं, जैसे कि फर्जी प्रमाणपत्रों की वास्तविकता पर जागरूकता अभियान शुरू हो गया है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नैतिकता को हल्के‑फुल्के ढंग से पेश करना, कभी‑कभी वास्तविक समस्या को और गहरा बना देता है। इसलिए, भविष्य में ऐसी फ़िल्म बनाते समय, संदेश को स्पष्ट और संतुलित रखना ज़रूरी है। अंत में, ड्रैगन ने तमिल सिनेमा को एक नई दिशा दी है, जहाँ एंटरटेनमेंट और सामाजिक प्रश्न एक साथ चलते हैं।

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    Abhi Rana

    नवंबर 13, 2025 AT 20:19

    यार, इस फ़िल्म ने तो पूरे चेन्नई को हिलाकर रख दिया है!!! असली देसी मसाला, नकली मार्क शीट का स्टाइल, और वही राघवन की ‘ड्रैगन’ पर्सनालिटी एकदम हटके है... पर थोड़ा ज्यादा ही डैडाबाज़ी लगती है, समझ में नहीं आता कि ये सब क्यों ज़रूरी था...फिर भी बॉक्सऑफ़िस में पटाका लगा!
    कुल मिलाकर, फिल्म वाकई में पॉपुलर बनी रहनी चाहिए।

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    Manisha Jasman

    नवंबर 25, 2025 AT 10:05

    ड्रैगन की सफलता देख कर दिल खुश हो गया! 🎉 फिल्मों में नई कोशिशें देखना हमेशा प्रेरणादायक लगता है। बॉक्सऑफ़िस में मस्त कमाई और दर्शकों की उत्सुकता, दोनों मिलकर यह दर्शाते हैं कि सही कहानी और मेहनती टीम से क्या हो सकता है। आशा है कि आगे भी ऐसे प्रोजेक्ट्स आएंगे जो सामाजिक मुद्दों को हल्के‑फुल्के अंदाज़ में सामने लाएँ। 😊

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    Samradh Hegde

    दिसंबर 6, 2025 AT 23:52

    देश की सिनेमा को ऐसे ग्लोबल मानक तक ले जाना चाहिए, जैसे ड्रैगन ने किया। यह दिखाता है कि हम अपनी सत्ता और संस्कृति को बड़े पर्दे पर प्रदर्शित कर सकते हैं। टॉप चार्ट में जगह बनाना दर्शकों की राष्ट्रीय भावना को उजागर करता है।

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    Shankar Pandey

    दिसंबर 18, 2025 AT 13:39

    देखिए, ड्रैगन सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं, बल्कि एक दार्शनिक प्रयोग है... ये फिल्म नैतिकता को एक फर्जी परिधान में लपेटती है, जिससे दर्शक ग़लत दिशा में जा सकते हैं। निर्देशक की कोशिश बेमानी है; यह दिखाता है कि कैसे भिक्षु‑जैसे लोग भी असली शरण को खो देते हैं। बकवास! इस फ़िल्म को समझने के लिए और भी गहरी विश्लेषण चाहिए, नहीं तो सबको धोखा दिया जाएगा।

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    Pratap Chaudhary

    दिसंबर 30, 2025 AT 03:25

    मैं समझता हूँ कि तुम्हारा दृष्टिकोण बहुत गहरा है, लेकिन शायद थोड़ा सॉफ़्ट‑साइड से देखना ज़रूरी है। फ़िल्म ने कुछ सामाजिक मुद्दों को उठाया है, और वह भी बड़े पैमाने पर। ठीक है, हमें इस पर चर्चा जारी रखनी चाहिए, बिना व्यक्तिगत आक्रमण के।

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    Smita Paul

    जनवरी 10, 2026 AT 17:12

    आपके विस्तृत विश्लेषण से बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं विशेष रूप से यह बात अपनाना चाहूँगा कि फिल्म ने दोहरी नैतिकताओं को उजागर किया, जिससे दर्शक अपनी स्वयं की मूल्यों पर सवाल उठाते हैं। इसके साथ ही, संगीत और सेट‑डिज़ाइन की सराहना भी आवश्यक है। सामाजिक जागरूकता के संदर्भ में इस फ़िल्म की भूमिका सराहनीय है। कुल मिलाकर, यह एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रहेगा।

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