साइक्लोन दित्वाह ने श्रीलंका में 123 लोगों की मौत कराई, अब तमिलनाडु और पुदुचेरी की ओर बढ़ रहा है

साइक्लोन दित्वाह ने श्रीलंका में 123 लोगों की मौत कराई, अब तमिलनाडु और पुदुचेरी की ओर बढ़ रहा है

जब साइक्लोन दित्वाह श्रीलंका के तटीय क्षेत्रों से टकराया, तो लोगों ने अपनी आँखों से एक ऐसा विनाश देखा जिसकी कल्पना भी नहीं की थी। साइक्लोन दित्वाह ने श्रीलंका में कम से कम 123 लोगों की जान ले ली और लगभग 130 लोग अभी भी गायब हैं — ये आंकड़े भारतीय मौसम विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार हैं। लेकिन श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) का दावा है कि मौतों की संख्या 212 तक पहुँच गई है। ये आंकड़े अलग-अलग स्रोतों से आ रहे हैं, लेकिन एक बात स्पष्ट है: यह तूफान एक विनाशकारी आपदा बन गया है। अब यह साइक्लोन भारत की ओर बढ़ रहा है, और तमिलनाडु, पुदुचेरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों को अगले 24 घंटों में जोरदार बारिश और तेज हवाएँ चेतावनी दे रहा है।

श्रीलंका में आपदा का विस्तार

श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी जिलों में बाढ़ और भूस्खलन ने लाखों लोगों को अपने घरों से बाहर धकेल दिया। श्रीलंका का आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के अनुसार, 9,98,918 लोग 2,73,606 परिवारों में प्रभावित हुए हैं। जहाँ कुछ जिलों में 44,000 लोग बाधित हुए, वहीं अन्य क्षेत्रों में तो पूरे गाँव बह गए। बारिश के कारण सड़कें बह गईं, बिजली के खंभे गिरे, और ट्रेनें अटक गईं। एक भूस्खलन ने कोटमाले क्षेत्र में एक पूरा आवासीय कॉलोनी दबा दिया — जहाँ अभी तक कई लोगों के शव नहीं मिल पाए हैं।

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिस्सानायके ने आपातकाल की घोषणा कर दी। उन्होंने तुरंत 1.2 अरब श्रीलंकी रुपये (लगभग ₹570 करोड़) आपातकालीन राहत के लिए जारी किए और 2025 के बजट में 30 अरब श्रीलंकी रुपये आपदा प्रबंधन के लिए आवंटित किए। जिला सचिवों को अब 50 मिलियन रुपये तक बिना किसी लंबी प्रक्रिया के खर्च करने का अधिकार दे दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने रक्षा मुख्यालय में एक विशेष समन्वय इकाई शुरू की और दस आपातकालीन हॉटलाइन्स चलाईं।

भारत की ओर से ऑपरेशन सागर बंधु

भारत ने तुरंत अपनी राहत मिशन की शुरुआत कर दी — ऑपरेशन सागर बंधुराष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भारतीय वायु सेना (IAF) और भारतीय नौसेना ने एक साथ काम करना शुरू कर दिया। दो मिलिट्री विमानों द्वारा 21 टन राहत सामग्री — जिसमें पानी, खाना, दवाएँ और तम्बू शामिल थे — श्रीलंका भेजे गए। पिछले दिन ही 6 टन से अधिक सामग्री भेजी गई थी।

वायु सेना ने तीन गंभीर रूप से घायल श्रीलंकी नागरिकों को कोलंबो ले जाकर उपचार कराया। इसके अलावा, पाँच टीमें — हर टीम में 40 सैनिक — कोटमाले के भूस्खलित क्षेत्र में पहुँचाई गईं। ये टीमें बचाव और शव निकालने के काम में लगी हैं। भारत ने श्रीलंका के साथ इस आपदा में न सिर्फ सामग्री बाँटी, बल्कि जान बचाने के लिए अपने सैन्य संसाधनों को भी लगा दिया।

भारतीय तटों पर खतरा

साइक्लोन दित्वाह अब श्रीलंका से दूर हो रहा है, लेकिन इसका खतरा भारत के तटीय क्षेत्रों के लिए बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह आज रात तक तमिलनाडु-पुदुचेरी तट के 60 किमी के भीतर पहुँचेगा। सुबह तक यह 50 किमी और शाम तक 25 किमी के भीतर आ जाएगा। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों में 100-150 मिमी बारिश की उम्मीद है। हवाएँ 90-110 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं।

तमिलनाडु के कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली और पुदुचेरी के तटीय इलाकों में आपातकालीन तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने जनता को उच्च भूमि पर जाने के लिए आह्वान किया है। अस्पतालों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं। नौसेना और तटरक्षक बल तैयार हैं। यहाँ तक कि जल निगम ने भी अपने पानी के टैंक भर लिए हैं — क्योंकि बारिश के बाद पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है।

भारतीयों की फँसी हालत

श्रीलंका में फँसे लगभग 300 भारतीय यात्री अभी भी विमाननिरोध के कारण रह गए हैं। उनके फ्लाइट्स रद्द हो चुके हैं और अस्थायी आश्रयों में रहने के लिए मजबूर हैं। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई की। कुछ यात्रियों को भारतीय वायु सेना के विमानों द्वारा बचाया गया। कबार गाँव के अनुसार, 400 भारतीयों को पहले ही भारत लौटा दिया गया है। लेकिन अभी भी कई लोगों के परिवार चिंतित हैं — उनके पास न तो संपर्क है, न ही सुरक्षित ठिकाना।

आगे क्या होगा?

साइक्लोन अब उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर 10 किमी/घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तूफान भारतीय तट पर आकर थोड़ा कमजोर हो जाएगा, लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक बारिश और बाढ़ का खतरा बना रहेगा। श्रीलंका में बाढ़ के पानी उतर रहे हैं, लेकिन अभी भी बहुत सारे लोग बीमार हैं — दूषित पानी के कारण डायरिया, टायफाइड और डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं।

इस आपदा के बाद भारत और श्रीलंका के बीच आपदा प्रतिक्रिया सहयोग का एक नया मॉडल बन सकता है। ऑपरेशन सागर बंधु केवल एक राहत मिशन नहीं, बल्कि एक ऐसा संदेश है जो कहता है — जब एक देश आपदा में है, तो पड़ोसी उसके साथ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइक्लोन दित्वाह के कारण तमिलनाडु और पुदुचेरी में क्या खतरा है?

IMD के अनुसार, तमिलनाडु और पुदुचेरी के तटीय क्षेत्रों में 100-150 मिमी बारिश और 90-110 किमी/घंटा की तेज हवाएँ आने की संभावना है। बाढ़, बिजली के खंभों का गिरना और सड़कों का बह जाना सबसे बड़ा खतरा है। जिला प्रशासन ने 25 जिलों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी हैं।

श्रीलंका में मौतों की संख्या इतनी अलग-अलग क्यों है?

अलग-अलग स्रोतों के आंकड़े अलग हैं क्योंकि भूस्खलनों के क्षेत्रों में अभी तक बचाव कार्य जारी है। कुछ गाँवों में अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। जब तक सैन्य और नागरिक टीमें पूरे क्षेत्र का नक्शा नहीं बना लेतीं, तब तक आंकड़े अपडेट होते रहेंगे।

भारत ने श्रीलंका को क्या राहत सामग्री भेजी है?

भारत ने 21 टन राहत सामग्री भेजी है, जिसमें 5000 पानी के बोतल, 12,000 रेडी-टू-ईट खाने के पैकेट, 2000 तम्बू, 1500 आपातकालीन बेड और 300 किलो दवाएँ शामिल हैं। इसके अलावा, एक आपातकालीन चिकित्सा टीम भी श्रीलंका के साथ है।

क्या यह साइक्लोन भारत में भी तूफान के रूप में आएगा?

नहीं। IMD के अनुसार, यह साइक्लोन भारतीय तट के बहुत करीब आएगा, लेकिन भूमि पर नहीं टकराएगा। यह एक तूफान के रूप में नहीं, बल्कि एक तेज तूफानी निम्न दबाव के रूप में प्रवेश करेगा। फिर भी, बारिश और हवाएँ जोखिम भरी हैं।

आपदा के बाद श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को क्या प्रभाव पड़ेगा?

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पहले से ही गिरावट में है। इस आपदा से बिजली, सड़कों और बाजारों को नुकसान हुआ है। कृषि क्षेत्र में 40% फसलें बह गई हैं। आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि नुकसान ₹15,000 करोड़ से अधिक हो सकता है।

भारत और श्रीलंका के बीच आपदा प्रतिक्रिया सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?

इस आपदा ने दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक बंधनों को फिर से जोड़ दिया है। भारत की तेज और संगठित प्रतिक्रिया ने श्रीलंका के लोगों के बीच विश्वास बढ़ाया है। यह एक ऐसा नमूना है जो भविष्य में दक्षिण एशिया में आपदा प्रबंधन के लिए मानक बन सकता है।

  • Pooja Joshi

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12 टिप्पणि

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    Alok Kumar Sharma

    दिसंबर 1, 2025 AT 05:43

    ये साइक्लोन तो बस एक बार आया और श्रीलंका को धूल चटा गया। अब भारत के तट पर आने वाला है, लेकिन इसके लिए हम तैयार हैं या फिर फिर से बस रिपोर्ट्स लिखेंगे?

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    Tanya Bhargav

    दिसंबर 1, 2025 AT 20:44

    श्रीलंका में जितने लोग बेघर हुए हैं उनमें से कई तो हमारे ही लोग हैं। जब भारत ने तुरंत राहत भेजी तो मुझे गर्व हुआ। ये सिर्फ राहत नहीं, ये बंधन है। अब तमिलनाडु के लोगों को सावधान रहना होगा।

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    Sanket Sonar

    दिसंबर 2, 2025 AT 10:26

    IMD का फॉरेकास्ट स्पष्ट है - न्यूनतम लैंडफॉल, मैक्सिमम इंटरैक्शन। तेज वायु धाराएँ, गहरा निम्न दबाव, और अत्यधिक असमान वर्षा वितरण। तटीय जनसंख्या के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की अपर्याप्त सहनशक्ति सबसे बड़ी चुनौती है।

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    Ambika Dhal

    दिसंबर 3, 2025 AT 21:12

    हमेशा ऐसा ही होता है। जब कोई आपदा आती है, तो सब राहत देने की बात करते हैं। लेकिन जब बारिश होती है तो लोग बारिश के बाद के अपशिष्ट को नहीं देखते। बाढ़ के बाद बीमारियाँ फैलेंगी, और कोई नहीं पूछेगा कि अस्पतालों में दवाएँ कहाँ हैं।

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    Vaneet Goyal

    दिसंबर 5, 2025 AT 01:29

    21 टन राहत? अच्छा है। लेकिन श्रीलंका के लिए ये कितना काफी है? जब तक आप उनके निर्माण प्रणाली को नहीं बदलते, तब तक हर तूफान एक नया विनाश लाएगा। भारत को बस राहत नहीं, बल्कि रिसिलिएंस बिल्डिंग का समर्थन करना चाहिए।

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    Vidushi Wahal

    दिसंबर 6, 2025 AT 01:20

    मैं तमिलनाडु से हूँ। हमारे गाँव में तो बारिश के बाद पानी का नल दो दिन बंद रह जाता है। अगर ये साइक्लोन आया तो शायद हमें भी अस्थायी आश्रय में रहना पड़ेगा। उम्मीद है कि अब लोगों को असली खतरा समझ में आएगा।

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    Narinder K

    दिसंबर 8, 2025 AT 00:20

    ये साइक्लोन भारत में नहीं आएगा... लेकिन बारिश तो आएगी। तो फिर ये बारिश क्या है? एक बड़ा बादल जिसने अपना नाम बदल लिया? ये IMD का भाषण है या मौसम का विज्ञान?

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    Narayana Murthy Dasara

    दिसंबर 8, 2025 AT 10:00

    मैंने श्रीलंका के बारे में कभी नहीं सोचा था, लेकिन आज जब मैंने ये पोस्ट पढ़ी, तो मुझे लगा कि हम सब एक ही परिवार हैं। जब एक के घर में आग लगी, तो दूसरा उसकी दीवार तोड़कर बचाता है। ऑपरेशन सागर बंधु वैसा ही है। ये दिखाता है कि देशों के बीच दूरियाँ कितनी छोटी हो सकती हैं।

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    lakshmi shyam

    दिसंबर 10, 2025 AT 02:21

    अगर श्रीलंका के लोगों ने अपने घर बेहतर बनाए होते, तो ये आपदा इतनी भीषण नहीं होती। अब भारत को उनकी गलतियों का बोझ उठाना पड़ रहा है।

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    Sabir Malik

    दिसंबर 10, 2025 AT 11:03

    मैं तमिलनाडु के एक छोटे शहर से हूँ। मैंने देखा है कि बारिश में बह जाने वाली सड़कें, बिजली के खंभे, और बाढ़ के बाद जो लोग बीमार पड़ जाते हैं। ये साइक्लोन तो बस एक और चेतावनी है - हमारे निर्माण के तरीके को बदलने की। अगर हम अभी से तैयार हो जाएँ, तो अगली बार कम नुकसान होगा। मैंने अपने पड़ोसियों को बताया है कि वे अपने घरों के आसपास नालियाँ साफ करें। छोटी बातें, बड़ा असर।

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    Debsmita Santra

    दिसंबर 10, 2025 AT 14:47

    इस आपदा में जो भारतीय वायु सेना ने श्रीलंका के घायलों को बचाया और आपातकालीन टीमें भेजीं वो बहुत बड़ी बात है। लेकिन अब तमिलनाडु में जो लोग बारिश के बाद बीमार हो रहे हैं उनके लिए भी एक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम चाहिए। दवाएँ, स्वच्छ पानी, और जागरूकता अभी भी बहुत कम है। हमें ये सिर्फ एक तूफान नहीं देखना चाहिए, हमें इसके बाद के स्वास्थ्य चुनौतियों को भी देखना होगा।

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    Vasudha Kamra

    दिसंबर 12, 2025 AT 08:14

    श्रीलंका के लोगों के लिए भारत की राहत बहुत अच्छी है। लेकिन अब तमिलनाडु के लोगों को अपनी तैयारियाँ दोबारा चेक करनी चाहिए। बारिश से पहले बिजली के खंभे, नालियाँ, और घरों के छतों की जाँच कर लें। छोटी चेतावनी, बड़ा बचाव।

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